10 Lines on Mahatma Gandhi in Hindi। महात्मा गाँधी पर 10 लाइन निबंध

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महात्मा गाँधी जी का भारत को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। महात्मा गाँधी का जीवन असाधारण रहा है। महात्मा गाँधी जी के जन्म दिवस को Gandhi Jayanti के नाम से जाना जाता है। हर साल 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती मनाई जाती है। इसलिए आज हम “महात्मा गाँधी पर 10 लाइन निबंध” लेकर आपके समक्ष आये है इस आर्टिकल में आप “10 Lines on Mahatma Gandhi in Hindi” में पढ़ेंगे।

Mahatma Gandhi in Hindi

विश्व में कई लोग ऐसे होते हैं जो अपने कर्मों से हमेशा अमर रहते हैं। युगो युगो तक वे अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं। वैसे तो हमारे देश में कई महात्मा पैदा हुए, जिन्होंने अपने कर्मों से और अपना बलिदान देकर हमें महानता का पाठ पढ़ाया ऐसे ही कई लोगों में सबसे पहला नाम जो हमारे जहन में आता है वह है महात्मा गांधी।

सादगी, सरलता, सत्यता,उच्च विचार, सादा जीवन और अनेक इस प्रकार के आदर्शों से परिपूर्ण इस महात्मा को पूरी दुनिया युगो युगो तक याद रखेंगी।

जीवन परिचय 

महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इनका जन्म 2 अक्टूबर सन 1869 को गुजरात के पोरबंदर जिले में हुआ था।इनकी माता का नाम पुतलीबाई और पिता का नाम करमचंद गांधी था।गांधी जी के पिता अंग्रेजों के शासन के दौरान पोरबंदर राजकोट के दीवान थे।गांधीजी तीन भाई थे जिनमें यह सबसे छोटे थे इनकी माता धार्मिक विचारों वाली महिला थी।

शिक्षा

महात्मा गांधी की शिक्षा मुंबई यूनिवर्सिटी से हुई।यहां उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की उसके बाद उन्होंने भावनगर सामलदास कॉलेज में दाखिला लिया। गुजराती से अंग्रेजी भाषा में जाने से उन्हें पढ़ने में काफी कठिनाई होने लगी। उनकी दिलचस्पी डॉक्टर बनने की थी, पर भी गुजराती वैष्णव परिवार में चीर फाड़ के खिलाफ पूर्वाग्रह के अलावा यह भी स्पष्ट था कि यदि उन्हें गुजरात के किसी राजघराने में उच्च पद प्राप्त करने की पारिवारिक परंपरा निभानी है, तो उन्हें बैरिस्टर ही बनना पड़ेगा इसीलिए वे बैरिस्टर की पढ़ाई हेतु इंग्लैंड चले गए। सितंबर 1888 में वह पानी के जहाज पर सवार हुए। वहां पहुंचने के 10 दिन बाद लंदन के 4 कानून महाविद्यालय में से एक इंटर टेंपल में दाखिल हुए गांधीजी ने अपनी पढ़ाई को गंभीरता से लिया और लंदन यूनिवर्सिटी मैट्रिकुलेशन की परीक्षा में बैठकर अंग्रेजी तथा लैटिन भाषा को सुधारने का प्रयास किया।

बदलाव का रूख

गांधीजी जब इंग्लैंड से भारत लौटे तो, उनकी माता का देहांत हो चुका था। वह मुंबई उच्च न्यायालय में अल्पकालिक शिक्षक के पद पर भी रहे। दक्षिण अफ्रीका में नडाल स्थित एक भारतीय कंपनी के अंतर्गत 1 साल के अनुबंध को उन्होंने स्वीकार किया जो कि उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदलने वाला था। दक्षिण अफ्रीका में जाकर उन्होंने देखा कि कैसे भारतीयों के साथ जुल्म हो रहा है।और पहली बार उन्होंने इस दर्द को महसूस किया।

गांधी जी का संघर्ष 

दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद भारतवासियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए गांधीजी ने इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना की।पहली बार सत्याग्रह के शस्त्र का प्रयोग किया और विजय भी पाई। इस प्रकार सन 1914 – 1915 में गांधीजी जब दक्षिण अफ्रीका से वापस लौटे तब उनके विचारों और जीवन व्यवहारो  में आमूलचूल परिवर्तन आ चुका था।भारत लौटकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जैसी संस्था को पूर्ण स्वतंत्रता का लक्ष्य देकर संघर्ष में कूद पड़े। उन्होंने अंग्रेजी कानून का बहिष्कार करके सत्याग्रह का बिगुल बजा दिया। भारतवासियों के मानवाधिकारों का हनन करने वाले रोलेट एक्ट का जगह-जगह विरोध हुआ। सन 1919 में जलियांवाला बाग में हो रही विरोध सभा पर हुए अत्याचार ने गांधीजी को गांधीजी की अंतरात्मा को हिला कर रख दिया।अब से समुचित स्वतंत्रता आंदोलन की बागडोर संभाल खुल्लम-खुल्ला संघर्ष में कूद पड़े। बिहार की नील सत्याग्रह, दांडी यात्रा या नमक सत्याग्रह खेड़ा का किसान सत्याग्रह गांधीजी के जीवन के प्रमुख सत्याग्रह आंदोलन रहे। विदेशी बहिष्कार और विदेशी माल का दाह, अछूतोंद्वार स्वदेशी प्रचार के लिए चरखे और खादी का महत्व सर्व धर्म एकता के प्रचार के लिए आरंभ किए गए अन्य समाज सुधारक आंदोलन में शामिल है। इसीलिए इन्हें कई बार जेल की यात्रा करनी पड़ी।1931 में इंग्लैंड में आयोजित गोलमेज कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए गांधी जी वहां गए पर जब उनकी इच्छा के विरुद्ध हरिजनों को निर्वाचन का विशेषाधिकार हिंदुओं से अलग करके दे दिया गया तो भारत लौटकर गांधी जी ने पुनः आंदोलन आरंभ कर दिया। बंदी बनाए जाने पर जब यह अनशन करने लगे तो सारा देश क्षुब्ध हो गया फलस्वरूप ब्रिटिश सरकार को गांधीजी के मतानुसार हरिजनों का पृथक निर्वाचन अधिकार का हठ छोड़ना पड़ा। सन 1942 में मुंबई कांग्रेस के अवसर पर इनके द्वारा अंग्रेजों को दी गई चेतावनी अंग्रेजों भारत छोड़ो और भारतवासियों को करो या मरो की दी गई ललकार का जो भीषण परिणाम निकला उससे अंग्रेज भारत छोड़ने को बाधित हुए और आखिर 15 अगस्त 1947 को भारत को मुक्त कर इंग्लैंड वापस लौट गए। 

10 Lines on Mahatma Gandhi in Hindi

  1. महात्मा गाँधी जी का पूरा नाम “मोहनदास करमचंद गाँधी” था।
  2. गाँधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर शहर में हुआ था।
  3. गाँधी जी के पिता जी का नाम करमचंद गाँधी और माता जी का नाम पुतली बाई था।
  4. गाँधी जी का विवाह 15 वर्ष की आयु में हो गया था उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गाँधी था।
  5. महात्मा गाँधी जी ने अपने कनूर की पढ़ाई यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन से पूरी की थी।
  6. गाँधी जी राजनितिक गुरु के रूप में गोपाल कृष्ण गोखले जी आदर्श मानते थे।
  7. महात्मा गाँधी ने अंग्रेजो के खिलाफ असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन जैसे बड़े आंदोलन चलाये।
  8. मोहन दास करमचंद गाँधी को महात्मा, बापू, राष्ट्रपिता आदि नामो से पुकारा जाता है।
  9. 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे के द्वारा गाँधी जी की हत्या कर दी गयी थी ।
  10. महात्मा गाँधी जी की समाधी दिल्ली में स्थित है, जिसका नाम राजघाट है।

5 Lines on Mahatma Gandhi in Hindi

  1. गाँधी जी का पूर्ण नाम “मोहनदास करमचंद गाँधी” था।
  2. इनके पिताजी करमचंद गांधी राजकोट के दीवान के पद पर थे।
  3. इनके माताजी का नाम पुतली बाई था।
  4. गांधीजी को सुभाष चंद्र बोस ने हीं बापू नाम से संबोधित किया था।
  5. भारत में गांधी जी को राष्ट्रपिता के नाम से भी जाना जाता है।

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हमें आशा है आपको Mahatam Gandhi Essay पसंद आया होगा आप चाहे तो इस निबंध को Mahatma Gandhi Speech के रूप में भी प्रयोग कर सकते है।

FAQ 10 Lines on Mahatma Gandhi

Question : गाँधी जी को महात्मा की उपाधि किसने दी थी ?

Answer : गाँधी जी को महात्मा की उपाधि किसने दी इसके बीच मतभेद है। एक पक्ष का मानना है की गांधी जी के लिए महात्मा शब्द का प्रयोग पहली बार रविन्द्र नाथ टैगोर ने किया था। हालांकि कुछ इतिहासकारों यह मानते है की गांधी जी को सबसे पहली बार 1915 में राजवैद्य जीवन राम कालिदास ने महात्मा की उपाधि दी थी और उन्हें महात्मा कहकर संबोधित किया था।

Question : गाँधी जी की हत्या क्यों और किसने की थी ?

Answer : गाँधी जी की हत्या नाथू राम गोडसे ने की थी। नाथूराम गोडसे का मानना था की देश के विभाजन के लिए गाँधी जी ही जिम्मेदार है। पाकिस्तान और हिन्दुस्तान के बटवारे के बाद हिन्दू और मुस्लिमो का बहुत बड़ा नरसंहार हुआ गाँधी जी ने उसको रोकने का प्रयास नहीं किया ऐसा गोडसे का मानना था इसी क्रोध में उन्होंने गोली मारकर गाँधी जी की हत्या 30 जनवरी 1948 को कर दी थी।

Question : गाँधी जी के मुँह से मरते समय आखरी शब्द क्या थे ?

Answer : गाँधी जी के मुँह से निकले आखिरी शब्द थे ‘हे राम’।

Question : गाँधी जी के जन्मदिवस को किस प्रकार मनाया जाता है?

Answer : गांधीजी का जन्मदिवस 2 अक्टूबर को आता है इस दिन पुरे भारत में पूर्ण अवकाश रहता है। 2 अक्टूबर के पहले स्कूल कॉलेज सरकारी दफ्तर में लोग गांधीजी को याद करते है उनके जन्मदिवस को याद कर के बहुत से कार्यक्रम आयोजित किये जाते है।

Question : गाँधी जी किस राजनितिक पार्टी के सदस्य थे?

Answer : महात्मा गाँधी जी राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य थे।

Question : गांधी जी भारत कब आए?

Answer : गाँधी जी दक्षिण अफ्रीका से1915 में भारत वापस आये थे ।

Question : धर्म के प्रति गांधीजी के क्या विचार थे?

Answer : गाँधी जी धर्म से हिन्दू थे। गाँधी जी का मानना था की परमात्मा का कोई धर्म नहीं होता है। लोगो का दर्द समझने वाला ही धार्मिक है। गाँधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे उनका मानना था की सत्य उनका भगवान् है और अहिंसा द्वारा इसे प्राप्त किया जा सकता है।